राशि प्लान्ट लीलागर नदी में घोल रहा रासानिक जहर…संकट में जलीय जीव और मानव..ग्रामीणों ने कहा..अब आर-पार की जंग

फैक्ट्री के गंदे पानी से बिगड़ रहा पानी का पीएच

राशि प्लान्ट लीलागर नदी में घोल रहा रासानिक जहर...संकट में जलीय जीव और मानव..ग्रामीणों ने कहा..अब आर-पार की जंगबिलासपुर—राशि स्टील एंड पावर प्लांट से फैक्ट्री का गंदा पानी और दूषित पानी लीलागर नदी में छोड़ा जा रहा है। जिसके चलते पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोेश है। बावजूद इसके प्लांट प्रबंधन अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहा है। जिला प्रशासन भी हाथ पर हाथ रखकर बैठा है। जानकारी देते चलें कि कुछ महीने पहले ही घूमा स्थित भाटिया वाइन फैक्ट्री का गंदा पानी  शिवनाथ नदी में छोड़ा गया था। जिसके चलते मछली समेत अन्य जलजीवों की मौत हो गयी थी। मामले में कोर्ट ने संज्ञान लिया। हाईकोर्ट प्रकरण में शासन समेत भाटिया वाइन और अन्य को तलब किया था। मामले में अब भी सुनवाई चल रही है। कुछ इसी तरह का मामला लीलागर नदी के साथ भी हो रहा है।
नदी में रासायनिक की मिलावट
  मस्तूरी थाना क्षेत्र स्थित ग्राम पाराघाट वासी समेत लीलागर नदी तट पर बसे ग्रामीणों में राशि स्टील एंड पावर प्लांट को लेकर इन दिनों  जमकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। जानकारी देते चलें कि राशि स्टील एण्ड पावर प्लान्ट मस्तूरी क्षेत्र के पाराघाट स्थित लीलागर नदी के तट पर स्थापित है। जब तक प्लान्ट से फैक्ट्री का गंदा पानी बिना रिसाइकल किये नदीं में सीधे छोड़ दिया जाता है। एक दिन पहले भी प्रबंधन ने ऐसा ही किया। लेकिन इस बार ग्रामीणों प्लांट प्रबंधन की दादागिरी को लेकर जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है।
राशि प्लांट की दादागिरी
ग्रामीणों ने बताया कि राशि पॉवर प्लांट की दादागिरी से ना केवल मानव जिन्दगियों को बल्कि हमारे जानवरों को खतरा है। प्लान्ट से निकले गंदे पानी को बिना रिसाइकिल कर सीधे नदी में डाल दिया जाता है। गंदे पानी के साथ रासायनिक अपशिष्ट पदार्थ को भी प्लांट से नदी में बहाया जा रहा है। जिसके चलते किलोमीटर तक नदी प्रदूषित हो जाती है।
पानी का बदला पीएच..जीव जन्तुओं को खतरा
रासायनिक मामलों के जानकारों ने बताया कि नदी के पानी में ऑक्सीजन की कमी के अलावा क्लोराइड, नाइट्रेट और सल्फेट की मात्रा बढ़ जाती है। अपशिष्ट रासायनिक तत्वों से पानी का पीएच गड़बड़ हो जाता है। इसके चलते पानी विषाक्त हो जाता है। पीएच बदलने से जलीय जीवों की मौत निश्चित है।
रासायनिक वैज्ञानिकों के अनुसार लीलागर नदी का पानी सिंचाई के साथ पेयजल के रूप में भी प्रयोग होता है। पानी का प्रयोग पशु भी करते हैं। लम्बे समय से सिंचाई होने के चलते मिट्टी को कैंसर हो जाता है। फसल का डीएनए भी बदल जाता है। जाहिर सी बात है कि मानव और पशुओं को गंभीर बीमारी होना स्वाभाविक है। विषाक्त पानी के प्रयोग से मानव के स्वास्थ्य पर बहुत ही विपरीत प्रभाव पड़ता है। विषाक्त पानी से जलीय जीवों चाहे प्लान्ट हो या जीव मरना निश्चित है।
लीलागर छोड़कर अब कहां जाए
ग्राम पाराघाट के ग्रामीणों ने बताया कि लीलागर नदी का पानी दैनिक जीवन में पीढियों से करते आ रहे हैं। लेकिन अब पानी का स्वभाव और स्वाद बदल गया है। प्लांट प्रबंधन दूषित पानी को नदी में जब तब छोड़ देता है। हमारे सामने मजबूरी है कि हमारे सामने नदी के अलावा पानी का दूसरा स्रोत नहीं है। नदी तट पर बसे गांव भनेसर, पाराघाट, देवगांव, खुडूभाठा, हिर्री समेत अन्य गांव में पशु पक्षियों को प्रदुषित जल के कारण स्वास्थ्य लगातार बिगड रहा है।
 मामले में जब प्लांट एमडी समेत अन्य अधिकारी  विनोद तिवारी और मनोज सागर से जानकारी मांगी गई। उन्होने शिकायत को ना केवल बहुत हल्के में लिया। बल्कि ग्रामीणों की शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। प्रदूषित पानी को ट्रीटमेन्ट के बिना नदी में क्यो डाला जा रहा है इसकी जानकारी उच्च अधिकारी ही विस्तार से दे पाएंगे। बहरहाल शिकायत को नजरअंदाज किए जाने को लेकर ग्रामीणों में भयंकर आक्रोश ैह।
ग्रामीणों ने बनाया आर पार का प्लान
  ग्रामीणों ने बताया कि दूषित पानी को लीलागर नदी में छोड़े जाने की शिकायत पर्यावरण विभाग से भी किये है। लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायत के बाद कई बार प्लान्ट ने रासायनिक पानी को नदीं छोड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार अब हमारे सामने उग्र आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। यद्यपि हमने इसके पहले कई बार आंदोलन किया..लेकिन प्लान्ट प्रबंधन अपनी मनमानी से बाज नहीं आया है। इस बार हम आर पार की लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
क्या हाईकोर्ट संज्ञान में लेगा
 सवाल उठता है कि क्या धूमा स्थित भाटिया डिस्टलरी की तरह हाईकोर्ट लीलागर नदी को प्रदूषित करने वाले राशि पॉवर प्लान्ट खिलाफ प्रकरण को स्वतः संज्ञान में लेगा। या फिर उग्र आंदोलन का इंतजार करेगा।
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Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।वर्तमान में CGWALL में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।

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